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वनस्पति किसे कहते हैं? | वनस्पति के प्रकार | प्रमुख मौसम

वनस्पति किसे कहते हैं? | वनस्पति के प्रकार | प्रमुख मौसम

आप मौसम के बारे में प्रतिदिन समाचार पत्रों में पढ़ते हैं, तथा टेलीविजन पर देखते हैं अथवा दूसरों को इस संबंध में बताते बातें करते हुए सुनते भी हैं। आप जानते हैं। कि मौसम वायुमंडल में दिन प्रतिदिन होने वाला परिवर्तन है। इसमें तापमान वर्षा तथा सूर्य का विकिरण इत्यादि शामिल है।

उदाहरण के लिए: मौसम कभी गर्म या कभी ठंडा होता है कभी-कभी आसमान में बादल छा जाते हैं तो कभी वर्षा होती है। आपने ध्यान दिया होगा कि जब खुद दिनों बाद मौसम गर्म रहता है तब उसको ऊनी वस्त्रों की आवश्यकता नहीं पड़ती है। आप खाने पीने में ठंडे पदार्थों को पसंद करते हैं।

भारत की ऋतु ( जलवायु )

  • शीत ऋतु-ठंडे मौसम में सूर्य की सीधी किरणें नहीं पड़ती है जिसके परिणाम स्वरूप उत्तर भारत का तापमान कम हो जाता है।
  • ग्रीष्म ऋतु-गर्मी के मौसम में सूर्य की किरणें अधिकतर सीधी पड़ती है तापमान बहुत अधिक हो जाता है दिन के समय गर्म एवं शुष्क पावन बहती है जिसे लू कहा जाता हैं।
वनस्पति किसे कहते हैं  वनस्पति के प्रकार  प्रमुख मौसम
वनस्पति किसे कहते हैं वनस्पति के प्रकार प्रमुख मौसम

सामान्यतः भारत में प्रमुख मौसम होते हैं

  • दिसंबर से फरवरी तक ठंडा मौसम
  • मार्च से मई तक गर्म मौसम
  • जून से सितंबर तक दक्षिण पश्चिम मानसून का मौसम
  • अक्टूबर और नवंबर में मानसून के लौटने का मौसम

वनस्पति किसे कहते हैं?

किसी स्थान की जलवायु उसके स्थिति ऊंचाई समुद्र से दूरी तथा उच्चावच पर निर्भर करती है। इसलिए हमें भारत की जलवायु में क्षेत्रीय विविधता का अनुभव होता है। राजस्थान के मरुस्थल में स्थित जैसलमेर तथा बीकानेर बहुत गर्म स्थान है। जबकि जम्मू तथा कश्मीर में दृश्य एवं कारगिल में बर्फीली ठंड पड़ती है तटीय क्षेत्र जैसे मुंबई तथा कोलकाता की जलवायु मध्यम है।

वे ना ही अधिक गर्म है और ना ही अधिक ठंडे। समुद्र तट पर होने के कारण यह स्थान बहुत अधिक आर्द्र है।विश्व में सबसे अधिक वर्षा मेघालय में स्थित मौसी यान राम में होती है जबकि किसी किसी वर्ष स्थान के जैसलमेर में वर्षा होती ही नहीं है।

वनस्पति दो प्रकार की होती है

  1. प्राकृतिक वनस्पति- हम अपने चारों तरफ विभिन्न प्रकार का पादप जीवन देखते हैं हमें घास वाले मैदान में खेलना कितना अच्छा लगता है कुछ पेड़-पौधों छोटे होते हैं जिन्हें झाड़ी कहा जाता है जैसे फूलों वाले पौधे इत्यादि इसके अतिरिक्त बहुत से लंबे वृक्ष होते हैं उनमें से कुछ मैं बहुत शाखाएं तथा पत्तियां होती है जैसे नियम तो कुछ वृक्ष ऐसे होते हैं जिन्हें पतियों की मात्रा बहुत कम होती है जैसे नारियल, घास , झाड़ियां तथा पेड़ पौधों जो बिना मनुष्य की सहायता से उगाए जाते हैं उन्हें प्राकृतिक वनस्पति कहा जाता है। जलवायू की विविधता के कारण भारत में अलग-अलग तरह की वनस्पतियां पाई जाती। भारत के वनस्पतियों को पांच प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है।
    • उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन
    • उष्ण कटिबंधीय पतझड़ वन
    • कटीली झाड़ियां
    • सदाबहार वन
    • पर्वतीय वन
  2. पर्वतीय वनस्पति-पर्वतों में ऊंचाई के अनुसार वनस्पतियों के विभिन्न प्रकार पाए जाते हैं चाय बढ़ने के साथ आसमान में कमी आती है।समुद्र तल से 1500 मीटर से 2500मीटर की ऊंचाई के बीच पेड़ों का आकार शंक्वाकार होता है।यह पेड़ पौधे शंकुधारी वृक्ष कहे जाते हैं इन वनों के महत्वपूर्ण वृक्ष चीड़, पाइन तथा देवदार है।

हमें वनों की आवश्यकता क्यों है?

भगवान हमारे लिए बहुत ही लाभदायक है। ये विभिन्न कार्य करते हैं। पेड़ पौधे ऑक्सीजन छोड़ते हैं जिसे हम सांस के रूप में लेते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड को करण करते हैं पेड़ पौधे की जगह मिट्टी को बात कर सकती है तथा किस प्रकार भी मिट्टी के अपरदन को रोकने हैं। वनों से हमें ईंधन, लकड़ी, चारा, जड़ी बूटियां, शहद इत्यादी प्राप्त होते हैं

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