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पृथ्वी के प्रमुख स्थल रूप ( स्थलाकृतियाँ ) क्या होते हैं? | प्रकार

पृथ्वी के प्रमुख स्थल रूप ( स्थलाकृतियाँ ) क्या होते हैं? | प्रकार

पृथ्वी पर अनगिनत प्रकार के रूप स्थल है। स्थलमंडल के कुछ भाग ऊंचे नीचे तथा कुछ समतल होते हैं। यह स्थल रूप दो प्रक्रियाओं के परिणाम स्वरूप बनते हैं, आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मैदान जिस पर आप खड़े हो उसमें धीरे-धीरे गति हो रही है।

पृथ्वी के अंदर लगाता गति हो रही है प्रथम या आंतरिक प्रक्रिया के कारण बहुत से स्थलों पर पृथ्वी की सतह कहीं ऊपर उठ जाती है तो कहीं धस है। ग्राहम स्थल का उपयोग गलत तरीकों से करते हैं।

उपजाऊ भूमि पर मकानों का निर्माण करना इसी प्रकार हम लोग कोड़ा किसी भी भूमि या पानी में फेंक देते हैं। जो कि उन्हें गंदा कर देती है। हमें प्रकृति के इस महत्वपूर्ण वरदान का उपयोग किस प्रकार नहीं करना चाहिए उपलब्ध भूमि केवल हमारे ही उपयोग के लिए नहीं है। यह हमारे कर्तव्य है कि हम आगे आने वाली पीढ़ी के लिए पृथ्वी को सुरक्षित रखें।

पृथ्वी के प्रमुख स्थल रूप ( स्थलाकृतियाँ ) क्या होते हैं  प्रकार
पृथ्वी के प्रमुख स्थल रूप ( स्थलाकृतियाँ ) क्या होते हैं प्रकार

पर्वत ( Mountain )

पर्वत पृथ्वी की सतह के प्राकृतिक ऊंचाई है। पर्वत का शिखर छोटा तथा आधार चौड़ा होता है। या आसपास के क्षेत्र से बहुत ऊंचा होता है। कुछ पहाड़ बादलों से भी ऊंचे होते हैं। जैसे-जैसे आपको चाय पर जाएंगे जलवायु ठंडी होती जाती है। किंतु पर्वतों पर हमेशा जमी रहने वाली बर्फ की नदियां होती है।

उन्हें हिमानी कहा जाता है यहां कुछ ऐसे भी पर्वत है। जो समुद्र के भीतर हैं तथा उन्हें आप नहीं देख सकते। कठोर जलवाए होने के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में बहुत कम लोग निवास करते हैं। वहां का धरातल खड़ी ढाल वाला होता है तथा कृषि योग्य भूमि की कमी होती है। पर्वत एक रेखा के क्रम में भी व्यवस्थित हो सकते हैं। जिसे श्रृंखला कहा जाता है।

पठार ( Plateau )

पठार उठी हुई एवं सपाट भूमि होती है। यह आसपास के क्षेत्रों से अधिक उठा हुआ होता है। तथा इसका ऊपरी भाग मैच के समान सपाट होता है। किसी पठार के एक या एक से अधिक किनारे होते हैं। जिनके ढाल खड़े होते हैं। पठानों की ऊंचाई पर आए कुछ 100 मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक हो सकती है।

पर्वतों की तरह पठार भी नए या पुराने हो सकते हैं भारत में दक्कन पठार पुराने पठानों में से एक है। पठारी क्षेत्रों में बहुत से जलप्रपात होते हैं। क्योंकि यहां नदियां ऊंचाई से गिरते हैं। भारत में छोटा नागपुर पठार पर स्वर्णरेखा नदी पर स्थित जलप्रपात तथा कर्नाटक में जो जलप्रपात इस प्रकार जलप्रपात के उदाहरण हैं।

मैदान ( field )

मैदान समतल भूमि के बहुत बड़े भाग होते हैं। वह सामान्यतः मध्य समुद्री तल से 200 मीटर से अधिक ऊंचे नहीं होते हैं। कुछ मैदान काफी समतल होता है। सामान्यता मैदान बहुत अधिक उपजाऊ होते हैं। यहां परिवहन के साधनों का निर्माण करना आसान होता है। इसलिए यह मैदान विश्व के सबसे अधिक जनसंख्या वाले भाग में होते हैं। नदियों के द्वारा बनाए गए कुछ बड़े मैदान एशिया तथा उत्तरी अमेरिका में पाए जाते हैं। एशिया में स्थित भारत में गंगा एवं ब्रह्मपुत्र का मैदान तथा चीन में यांगतेस नदी का मैदान इसके प्रमुख उदाहरण है।

स्थल रूप ( landforms ) एवं लोग

स्थल रूपों के अनुरूप ही मानव विभिन्न प्रकार से जीवन यापन करते हैं।पर्वतीय क्षेत्रों का जीवन कठिन होता है। मैदानी क्षेत्रों का जीवन परिवर्तन क्षेत्रों की तुलना में सरल होता है। मैदानों में फसलें उगाना घर बनाना या सड़के बनाना पर्वतीय क्षेत्रों की तुलना में अधिक आसान होता है।

विभिन्न प्रकार के इस साल रूपों पर रहने वाले लोगों के रहन-सहन के तरीकों में कुछ अंतर होता है। क्या आप पूनम में से कुछ अंतरों को बता सकते हैं कभी-कभी प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप ज्वालामुखी तूफान या बार बहुत विनाश कर देते हैं। इन आकस्मिक घटनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करके हम इस में आने वाले खतरों को कम कर सकते हैं। हम कितने तरीकों से जल एवं इस पल को उपयोग में ला सकते हैं। इसका पता हम अपने आसपास के क्षेत्रों से लगा सकते हैं।

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